Monday, December 28, 2020

सरकार किसानों को कमजोर समझने की गलती कर रही है क्यों

 एक माह से अधिक का समय किसानों को आंदोलन करते हुए बीत चुका है मगर किसानों का सब्र का पैमाना नहीं छलका है इसका मतलब यह नहीं है कि आंदोलन में आंधी नहीं आ सकती है। सरकार को यह भी ध्यान रखना चाहिए की इस समय किसानों के आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलना शुरू हो गया है आज हालात यह है कि सरकारी नौकरी छोड़कर किसानों के आंदोलन में सहयोग और सेवा करने के लिए पहुंच चुके हैं। अभी यह संख्या काम है मगर धीरे-धीरे बढ़ सकती है क्योंकि अभी पंजाब पुलिस के डीआईजी एवं डॉक्टर जोकि दो लाख माह की नौकरी को ठुकरा सकते हैं तो सरकार को समझने की आवश्यकता है कि इस आंदोलन को नहीं रोका गया तो निश्चित ही सरकार के सामने परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। सरकार भले ही अपने मन को समझाने के लिए यह कह रही है कि किसानों की संख्या काफी काम है मगर सरकार को इसका अंदाजा स्वयं भी है क्योंकि सरकार ने सभी बॉर्डर्स से पूर्व ही पुलिस लगाकर आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों को रोका जा रहा है। सरकार द्वारा किसानों को रोकने पर शांति भंग हो सकती है। मगर सरकार भी क्या करें अगर किसानों को आंदोलन में शामिल होने देगी तो निश्चित किसानों को मजबूती मिलेगी जो सरकार बिल्कुल नहीं चाहती है।

सरकार और किसान मिलकर समस्या का हल निकाल सकते हैं मगर दोनों अपनी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं जोकि किसान और सरकार दोनों के लिए हित में नहीं है। किसान चाहते हैं कि तीनों काले काले रद्द हो और सरकार केवल तीनों कानूनों में कुछ बदलाव करते हुए किसानों को लॉलीपॉप थमाना चाहती है मगर किसान इस बार मूर्ख नहीं बनना चाहते है। किसानों की मांग किसी हद तक भी है क्योंकि किसानों को उनकी फसल की एमएसपी भी नहीं मिलती है और किसानों के द्वारा उत्पादित जब व्यापारी या खुरदरा विक्रेता के पास पहुंच जाती है तो फिर फसल एमआरपी पर बिकती है क्या यह सरकार को नहीं मालूम सब सरकार की आंखों के सामने होता है और प्रत्येक व्यक्ति इसे जानता और मानता है मगर फिर भी किसान को एमएसपी नहीं मिल सकती है।

धरना स्थल पर मौजूद एक बहुत ही छोटे से किसान ने बहुत ही पते की बात कहीं जोकि मेरे दिल को छू गई क्योंकि उक्त किसान का कहना है कि हम यानी किसान मूर्ख और कमजोर है नहीं तो सरकार व्यापारियों की तरह किसान के पास आने के लिए मजबूर होती जब उन्होंने पूरा खुलासा किया तो मुझे भी मानने पर मजबूर होना पड़ा। आंदोलनकारी किसान का कहना है की इस तरह की एकता किसानों में इससे पूर्व देखने को नहीं मिली। यही एकता अगर किसान अपनी फसलों के लिए योजना बनाएं और योजनाबद्ध तरीके से अपनी फसलें उगाए तो निश्चित ही किसान को एमएसपी मांगने की आवश्यकता ही नहीं होगी। किसान का कहना है कि गेहूं, गन्ना, चावल, मक्का सहित अन्य एमएसपी पर बिकने वाली फसलों को आवश्यकता से कम उत्पादित करें और क्षेत्र वाइज फसलों का बटवारा करते हुए उगाए तो निश्चित ही किसानों को सफलता मिल सकती है। आंदोलनकारी किसान का कहना था कि शहरी क्षेत्र के नजदीक कृषि क्षेत्रों में केवल हरी सब्जी और फूल फल इत्यादि की खेती की जाए तो निश्चित ही ऐसे किसानों को भरपूर कीमत मिल सकती है। शहर से दूरी वाले क्षेत्र में आवश्यकता के अनुसार हरी सब्जी और एमएसपी वाली फसलें उगाई जाए निश्चित ही किसानों को लाभ मिलेगा और सरकार को सबक। आंदोलनकारी किसान का मानना है कि आवश्यकता से अधिक उत्पादन ही किसानों की दुर्दशा का जिम्मेदार है। किसान का मानना है की खाद्य उत्पादित सामग्री खरीदना सरकार की मजबूरी है और किसानों द्वारा उत्पादित करना।

आंदोलनकारी किसान का मानना है की किसानों को भी अब कृषि में मार्केटिंग मैनेजमेंट लागू करना होगा और इसके पश्चात सरकार स्वयं सोचने पर मजबूर हूं अंखियों के सामने ऐसा निर्णय क्यों लिया। किसान का मानना है की खेती यानी कृषि का उत्पादन कार्य मल्टीनेशनल कंपनियां नहीं कर सकती हैं यह कार्य केवल एक किसान द्वारा ही किया जा सकता है। सरकार अपनी चहेती कंपनियों को ऐसी भूमि उपलब्ध करा सकती है कि जहां मल्टीनेशनल कंपनियां खेती करें और खाद्य सामग्री उत्पादित करें मगर उसके लिए सरकार को मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए कृषि योग्य भूमि उपलब्ध करानी होगी। फिलहाल अभी किसान आंदोलन पर हैं हो सकता है आने वाले समय में कृषि में भी मैनेजमेंट और मार्केटिंग दोनों का उपयोग होने लगे और यह हालात कभी ना पैदा हो जैसे कि आज है। किसान सर्दी में सड़क पर और देश की सरकार...।

Friday, December 11, 2009

हस्ताक्षर और आपका भविष्य

यह तो आप जानते ही हैं कि हर व्यक्ति के दो रूप होते हैं - एक रूप जो उसके असली व्यक्तित्व को दर्शाता है तथा दूसरा रूप जो वह समाज में सबको दिखाने के लिए अपनाए रखता है। समाज में लोक मर्यादा के कारण कई बार हमें अलग तरह से व्यवहार करना पडता है जिसे आप कमजोरी भी कह सकते हैं अत: इसके फलस्वरूप व्यवहार में भिन्नता होना स्वाभाविक है।
हस्ताक्षर व्यक्ति के व्यक्तित्व का संपूर्ण आइना होता है अत: व्यक्ति के हस्ताक्षर में उसके व्यक्तित्व की सभी बातें पूर्ण रूप से दिखाई देती है। इस प्रकार हस्ताक्षर एक दर्पण है जिसमें व्यक्तित्व की परछाई स्पष्ट यप से झलकती है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर का पहला शब्द काफी बडा रखता है, वह व्यक्ति उतना ही विलक्षण प्रतिभा का घनी, समाज में काफी लोकप्रिय व उच्चा पद प्राप्त करने वाला होता है। हस्ताक्षर में पहला शब्द बडा व बाकी के शब्द सुन्दर व छोटे आकार में होते हैं, ऎसा व्यक्ति घीरे-घीरे उच्चा पद प्राप्त करते हुए सर्वोच्चा स्थान पाता है। ऎसा व्यक्ति जीवन में पैसा बहुत कमाता है। कई भवनों का मालिक बनता है व समाज में काफी लोकप्रिय होता है, किन्तु कुछ रंगीत तबियत का व संकोची स्वभाव का उत्तम श्रेणी का विद्वान भी होता है। वह अपने कुल का काफी नाम ऊँचा करता है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर इस प्रकार से लिखता है जो काफी अस्पष्ट होते हैं तथा जल्दी-जल्दी लिखे गये होते हैं, वह व्यक्ति जीवन को सामान्य रूप से नहीं जी पाता है। हर समय ऊँचाई पर पहुँचने की ललक लिए रहता है। इस प्रकार का व्यक्ति राजनीति, अपराघी, कूटनीतिज्ञ या बहुत बडा व्यापारी बनता है। जीवन आपाघापी में व्यतीत करने के कारण समाज से कटने लगता है तथा लोगों की अपेक्षा का शिकार भी बनता है। यह व्यक्तिगत रूप से पूर्ण संपन्न तथा इनका वैवाहिक जीवन कम सामान्य रहता है। घोखा दे सकता है परंतु घोखा खा नहीं सकता है। यह इनकी विशेषता है।
जो व्यक्ति हस्ताक्षर काफी छोटा व शब्दों को तोड-मरोडकर उनके साथ खिलवाड करता है जिसके फलस्वरूप हस्ताक्षर बिल्कुल पढने में नहीं आता है वह व्यक्ति बहुत ही घूर्त व चालाक होता है। अपने फायदे के लिए किसी का भी नुकसान करने व नुकसान पहुँचाने से नहीं चूकता। पैसा घन भी गलत रास्ते से कमाता है तथा ऎसा व्यक्ति राजनीति एवं अपराघ के क्षेत्र में काफी नाम कमाता है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर के नीचे दो लाइनें खींचता है वह व्यक्ति भावुक होता है। पूरी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाता, मानसिक रूप से थोडा कमजोर होता है। जीवन में असुरक्षा की भावना रहती है, जिसके कारण आत्महत्या करने का विचार मन में रहता है। पैसा जीवन में अच्छा होता है परंतु कंजूस स्वभाव भी रहता है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर के शब्दों को काफी घुमाकर सजाकर प्रदर्शित करके करता है वह व्यक्ति किसी न कसी हुनर का मालिक अवश्य होता है, यानि कलाकारख् गायक, पेंटर, व्यग्यकार व अपराघी होता है। ऎसे व्यक्तियों का समय जीवन के उत्तरार्द्ध में अच्छा होता है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर में नाम का पहला अक्षर सांकेतिक रूप में तथा उपनाम पूरा लिखता है तथा हस्ताक्षर के नीचे बिन्दु लगाता है, ऎसा व्यक्ति भाग्य का घनी होता है। मृदुभाषी, व्यवहार कुशल, समाज में पूर्ण सम्मान प्राप्त करता है। ईश्वरवादी होने के कारण इन्हें किसी भी प्रकार की लालसा नहीं सताती, इसके फलस्वरूप जो भी चाहता है स्वत: ही प्राप्त हो जाता है। वैवाहिक जीवन सुखी व संतानों से भी सुख प्राप्त होता है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर के अंतिम शब्द के नीचे बिंदु (.) रखता है। ऎसा व्यक्ति विलक्षण प्रतिभा का घनी होता है। ऎसा व्यक्ति जिस क्षेत्र में जाता है काफी प्रसिद्धि प्राप्त करता है और ऎसे व्यक्ति से बडे-बडे लोग सहयोग लेने को उत्सुक रहते हैं।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर स्पष्ट लिखते हैं तथा हस्ताक्षर के अंतिम शब्द की लाइन या मात्रा को इस प्रकार खींच देते हैं जो ऊपर की तरफ जाती हुई दिखाई देती हे, ऎसे व्यक्ति लेखक, शिक्षक, विद्वान, बहुत ही तेज दिमाग के शातिर अपराघी होते हैं। ऎसे व्यक्ति दिल के बहुत साफ होते हैं हरेक के साथ सहयोग करने के लिए तैयार रहते हैं। मिलनसार, मृदुभाषी, समाज सेवक, परोपकारी होते हैं। यह व्यक्ति कभी किसी का बुरा नहीं सोचते हैं, सामने वाला व्यक्ति कैसा भी क्यों न हो हमेशा उसे सम्मान देते हैं। सर्वगुण संपन्न होने के बावजूद भी आपको समाज में सम्मान घीरे-घीरे प्राप्त होता है। जीवन के उत्तरार्द्ध में आपको काफी पैसा व पूर्ण सम्मान प्राप्त होता है। जीवन में इच्छाएं सीमित होने के कारण इन्हें जो भी घन व प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। उससे यह काफी संतुष्ट रहते हैं। अंत में यही कहूंगा कि हस्ताक्षर या लिखावट से हमारा सीघा संबंघ मानसिक विचारों से होता है, यानि हम जो सोचते हैं करते हैं। जो व्यवहार मे लाते हैं वह सब अवचेतन रूप में कागज पर अपनी लिखावट व हस्ताक्षर के द्वारा प्रदर्शित कर देते हैं। हस्ताक्षर के अघ्ययन से व्यक्ति अपने भविष्य व व्यक्तित्व के बारे में जानकारी कर सकते हैं और हस्ताक्षर में दिखाई देने वाली कमियों को दूर करते हुए अच्छे हस्ताक्षर के साथ-साथ अपना भविष्य व व्यक्तित्व भी बदल सकते हैं।

Monday, October 19, 2009

हत्या के बाद युवक को जलाया

छावला इलाके में एक व्यक्ति की ईंट व चाकू मारकर हत्या कर दी गई और फिर कार सहित उसे जला दिया गया। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो शव पूरी तरह से जल चुका था। जांच में पुलिस को पता चला कि मामला हत्या का है। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच करने के बाद आरोपी राकेश (21) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि मृतक राजेश उसकी मां से मेल-जोल रखता था। इस पर उसे आपति थी।
पुलिस के अनुसार शुक्रवार की देर रात घुम्मन हेड़ा रोड के पास एक सेंट्रो कार में आग लगने की सूचना मिली थी। मौके पर पुलिस के पहुंचने से पहले आग को बुझाया जा चुका था। कार में सीटों के बीच एक व्यक्ति का शव पूरी तरह से जली अवस्था में पड़ा हुआ था। जांच के दौरान पता चला कि यह कार नंग्ली सकरावती में रहने वाली एक महिला के नाम पर है और उसका बेटा राजेश (39) गाड़ी लेकर गया था। वह इलाके का घोषित अपराधी था। आगे छानबीन करने पर पुलिस को पता चला कि राजेश का एक महिला से काफी मेलजोल था। वह अकसर उससे मिलने के लिए जाता था।इस पर महिला के बेटें आपति करते थे। छानबीन करने के बाद पुलिस ने महिला के बेटे राकेश को गिरफ्तार कर लिया। उसने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह राजेश को कई बार घर नहीं आने की चेतावनी दे चुका था। लेकिन वह मानता नहीं था। इसलिए शुक्रवार की रात वह राजेश के साथ गया और दोनों ने शराब पी। शराब पीने के बाद राकेश ने पहले ईंट से और फिर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर राजेश की हत्या कर दी। हत्या करने के बाद राजेश की पहचान मिटाने के लिए उसने सीट का कंवर फाड़ा और फिर गाड़ी में आग लगा दी थी। पुलिस उससे आगे पूछताछ कर रही है।

Saturday, October 10, 2009

हत्यारी पंचायतें

अजय प्रकाश

हर महीने आठ से दस प्रेमियों की हत्या करने वाली मध्ययुगीन बर्बर खाप पंचायतों के खिलाफ हरियाणा में मुकदमा दर्ज करने का इतिहास नहीं है।

मान-सम्मान के नाम पर बलात्कार, हत्या, बेदखली, सामाजिक बहिष्कार और आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाली इन पंचायतों का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में है जिन्हें देखकर तालिबान की याद आती है। हरियाणवी समाज में सदियों से पैठी इन तालिबानी मान्यताओं के पूजकों से आधुनिक मूल्यों के साथ खड़ा हो रहा नया समाज थर्राता है।
हरियाणा में पहली बार खाप के एक नेता को एक हत्याकांड के सिलसिले में जेल भेजा गया है। करनाल जिले के बनवाला खाप के नेता सतपाल को मातौर गांव के वेदपाल हत्याकांड मामले में गिरफ्तार किया गया है। हालांकि खाप पंचायत के खिलाफ मुकदमा दर्ज न कर पुलिस ने पंचायत को कटघरे में खड़ा होने से हमेशा की तरह फिर एक बार बचा लिया है। फिर भी न्यायालय कानून बनाने के लिए उसी राज्य का मुंह ताक रहा है जिसकी विधानसभा में खाप पंचायतों का सरेआम समर्थन करने वाले प्रतिनिधि बैठे हुए हैं।
राज्य के कानून विशेषज्ञों के मुताबिक छोटी अदालतों से लेकर हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी प्रेमी युगलों की सुरक्षा के आदश से आगे बढ़कर पंचायतों को अवैध घोषित करने या पंचायत सदस्यों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने के बारे में स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं दिये हैं। यहां तक कि प्रेमी युगलों की हत्याओं और सुरक्षा को लेकर पिछले वर्ष उच्च न्यायालय द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने भी जारी अपनी रिपोर्ट में ऐसा कोई सुझाव नहीं दिया है जिससे खाप या जातिगत पंचायतों के तालिबानी फरमानों पर सीधी चोट हो सके।
कमेटी के सदस्य और चंडीगढ़ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ स्थाई अधिवक्ता अनुपम गुप्ता का जवाब है, ‘मैंने जानबूझकर चर्चा नहीं की। सिर्फ जातिगत पंचायतों पर सवाल खड़ा करने से समस्या खत्म नहीं होने वाली।’ कई वकीलों से बातचीत में पता चला कि खाप पंचायतों पर इसलिए मुकदमा नहीं दर्ज किया जा सकता है कि संकट के समय उनकी एक सहयोगी भूमिका होती है। अगर इस आधार पर हम खापों को जायज ठहरायेंगे तो तालिबान के विरोध में कैसे खड़े हो पायेंगे।
कमेटी ने अपने बचाव में यह भी कहा कि कमेटी के गठन होने तक खापों के सीधे हस्तक्षेप जैसे मामले उजागर नहीं हुए थे। लेकिन सच्चाई यह है कि 27 जून 2008 में जब कमेटी का गठन हुआ तो उससे 36 दिन पहले 9 मई को बला गांव में कालीरमन खाप के आदेश पर प्रेमी जोड़े जसबीर और गर्भवती सुनीता की हत्या कर दी गयी थी। इसी तरह 2 अप्रैल को कमेटी की रिपोर्ट पेश होने से 20 दिन पहले 12 मार्च को करनाल जिले के मातौर गांव में बनवाला खाप ने वेदपाल और सोनिया को अलग होने का फरमान सुना दिया था। बाद में 26 जुलाई को वेदपाल की हत्या कर दी गयी।
इसी तरह अगस्त महीने में झज्जर जिले के धाड़ना गांव में रवींद्र और शिल्पा को भाई- बहन बनाये जाने के पक्ष में कादयान खाप का अगस्त के मध्य में चार दिनों का धरना चला। धरने में यह अभूतपूर्व था कि महिलाएं भी शामिल थीं। घोर स्त्री विरोधी इन खाप पंचायतों में महिलाओं का शामिल होना एकदम नयी घटना थी। सैकड़ों की संख्या में पुलिस ड्यूटी बजा रही थी कि कहीं पंचायत रवींद्र के घर में घुसकर आग न लगा दे, हत्या न कर दें। लेकिन किसी पंचायत प्रतिनिधि के खिलाफ इस मामले में कोई मुकदमा नहीं दर्ज हुआ।

हरियाणा पुलिस महानिदेशक विकास नारायण राय भी मानते हैं कि ‘पंचायतों पर शिकंजा कसने के मामले में कोताही बरती जाती रही है।’ पुलिस महानिदेशक को ‘प्रेमी सुरक्षा घर’ योजना से काफी उम्मीदें हैं। उल्लेखनीय है कि हरियाणा पुलिस ने प्रेमी जोड़ों को हत्यारों से बचाने के लिए ‘सेफ होम’ बनाने की घोशणा की है जिसकी देखरेख सीधे पुलिस के हाथों में होगी। लेकिन सवाल है कि हथियारों से लैस दस पुलिस वाले जब कादयान खाप के हमलावरों से वेदपाल को मरने से नहीं बचा सके तो वही पुलिसकर्मी उन घरों को खापों के हमले से कितना सुरक्षित रख पायेंगे। और इससे बड़ी बात है कितने दिन प्रेमी जोड़े गांव-घर से दूर ‘सेफ होम’ में जी पायेंगे।
इन मानवाधिकारों की रक्षा करने वाला दफ्तर ‘मानवाधिकारआयोग’ हरियाणा में नहीं है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शब्दों में,‘राज्य में ऐसे आयोग की आवश्यकता नहीं है।’ हां राज्य में महिला आयोग जरूर है जिसकी अध्यक्ष कांग्रेसी नेता सुशीला शर्मा हैं। खापों के खिलाफ आयोग ने किस तरह की कार्यवाई किये जाने की राज्य से सिफारिश की है, उनका जवाब था, ‘टेलीफोन न पर मैं थानों और अधिकारियों को राय सुझाती रहती हूं। महिला आयोग खापों पर शोध कर रहा है। शोध पूरा होने पर फैसला होगा।’
मुख्यमंत्री मानवाधिकार आयोग की जरूरत महसूस नहीं करते, महिला आयोग खापों पर शोध करवा रही है और अदालत की गठित कमेटी की रिपोर्ट में खाप और जातिगत पंचायतों पर कार्यवाही का जिक्र ही नहीं आता। वैसे में जीवनसाथी चुनने का अधिकार हरियाणा में कहां से मिलेगा?

दिल्ली पुलिस का इंसाफ

अजय प्रकाश
गुस्से और बौखलाहट से भर देने वाली ये तस्वीरें आपने देख ली होंगी। ये तस्वीरें दिल्ली प्रेस की अंग्रेजी पत्रिका कारवां से जुड़े पत्रकार जोएल इलिएट की हैं। इससे मिलती-जुलती तस्वीरें हमने इराक के अबू गरेब जेल की देखी थीं। लेकिन यह जेल की नहीं, दिल्ली के सड़कों के जेल बन जाने की बाद की हैं।
पुलिसिया काम के इस नमूने को हम इसलिए देख पा रहे हैं कि यह एक अमेरिकी पत्रकार के साथ किया गया इंसाफ है। पत्रकार जोएल इलिएट पत्रिका कारवां के साथ मई महीने से जुड़े हुए थे। इससे पहले वे न्यूयार्क टाइम्स, द क्रिष्चियन सांइस मानिटर, सैन फ्रांसिस्को, क्राॅनिकल और ग्लोबल पोस्ट के स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर काम करते रहे हैं।
दिल्ली के जंगपुरा की सड़कों पर पुलिस द्वारा पीटे जा रहे एक आदमी को बचाने के चक्कर में खुद षिकार हो गये जोएल फिलहाल अपने देष अमेरिका लौट गये हैं। हमें तो खुषी है वे बेचारे भारत के नहीं हैं, उपर से हिंदी के तो बिल्कुल भी नहीं। नहीं तो पुलिस वाले धमकाकर चुप करा देते, नहीं मानने पर मीडिया घराने का मालिक नौकरी से निकाल देता और बात अगर इससे भी नहीं बनती तो लड़कीबाज, दलाल या रैकेटियर बनाकर रगड़ देते। मौका तो रात का था ही जिसमें यह सब आसान होता।
यहां राहत है कि कारवां पत्रिका के प्रबंध संपादक अनंत नाथ और अमेरिकी दुतावास वाले इस मामले को गंभीरता से उठा रहे हैं। रही बात बिरादरों की तो, सब पूछ रहे हैं कि हम क्या कर सकते हैं......

Monday, July 6, 2009

जनता के लिए खास नहीं रहा बजट

केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की ओर से सोमवार को पेश किया गया बजट जनता के लिए खास नहीं रहा। उसे बजट में खास जगह नहीं मिली। बजट में विभिन्न टैक्स को कम करने पर जहां खास जोर दिया गया, वहीं उद्योगों की मंदी को लेकर किसी बड़े पैकेज का ऐलान नहीं किया गया। उद्योगपतियों का कहना है कि सरकार ने टैक्स तो कम कर दिए मगर मंदी से उबरने के लिए कोई बड़ा पैकेज नहीं दिया।बजट में आम वस्तुओं में सरकार ने मोबाइल, वाटर प्यूरीफायर, केबल वायर, ब्रांडेड ज्वेलरी, एलसीडी स्क्रीन आदि के दाम कम किए हैं, वहीं महंगाई को देखते हुए इस बार आम उपभोक्ता वस्तुओं मंे कोई गिरावट नहीं हुई। बुद्धिजीवियों ने बजट को मिला-जुला करार दिया है। उनका कहना कि सरकार ने इस बार सिर्फ टैक्स पर खास ध्यान दिया है। इसमें सरचार्ज, फ्रिंज टैक्स, कापरेरेट टैक्स को हटा दिया गया।

कर्मचारियों का वेतन स्तर बढ़ा :- चार्टर्ड एकाउंटेंट तरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि इस बजट से कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी होने की संभावना है। मिनिमम वेजेज निर्धारित करने से श्रमिकों को इस बजट से काफी राहत मिल सकती है।अभी मेहनत के बाद भी उन्हें सही वेतन नहीं मिल पाता है। आईसीएआई के प्रधान एसके बंसल ने बजट को मिला-जुला बताया। बजट में फ्रिंज बेनेफिट टैक्स को हटाने का उन्होंने स्वागत किया। माल भाड़े पर सर्विस टैक्स लगाने को उन्होंने गलत बताया।

निराशाजनक रहा आम बजट :- रीयल स्टेट से जुड़े दिव्यंेदु शेखर ने बजट को निराशाजनक बताया। उनका कहना है कि निर्माण के क्षेत्र मंे सरकार ने कोई पैकेज नहीं दिया। इससे मंदी को खत्म होने में समय लगेगा। उद्योगपति शंकर शर्मा का कहना है कि बजट से उद्योगों को खास फायदा नहीं होने वाला। हालांकि अन्य क्षेत्रों में शिक्षा और कृषि में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

बिजली पर नहीं दिया गया ध्यान :- चार्टर्ड एकाउंटेंट संगीत कुमार गुप्ता और संजीव गुप्ता का कहना है कि सरकार को बिजली के मामले में कुछ प्रभावकारी कदम उठाने चाहिए। उद्योगों को इस समस्या से भारी नुकसान हो रहा है। जिले में लगातार बिजली की कमी ने सभी के लिए समस्या पैदा कर रखी है। बजट में बिजली स्रोत को बढ़ाने के कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।

पेट्रो पदाथरें के बढ़े रेट वापस लिए जाएं :- विज्ञापन एजेंसी में काम करने वाले ऋषि का कहना है कि मोबाइल के दाम कम करने से क्या होगा। मोबाइल तो पहले से ही सस्ते थे। सरकार को ईधन के बढ़ाए दामों को वापस लेना चाहिए था। सरकार को महंगाई दर कम करनी चाहिए। हालांकि छात्रों के लिए नई केंद्रीय यूनिवर्सिटी की निर्माण योजना अच्छा कदम है।वहीं मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़ी सोनिया का कहना है किसरकार को खाद्य और घरेलू सामानों के दामों में और कमी लानी चाहिए थी। इससे गरीब तबके को राहत मिलती।डाक्टर और वकीलों के ऊपर सर्विस टैक्स लगाने को लेकर दोनों वर्ग ने निराशा जाहिर जताई है। आईएमए के अध्यक्ष डा. अनिल गोयल ने सर्विस टैक्स लगाए जाने पर इलाज के महंगे होने की संभावना जताई है।उन्होंने कहा कि इससे सबसे ज्यादा मार गरीब व मध्यम वर्ग को पड़ेगी। वहीं एडवोकेट अश्विनी त्रिखा ने भी इसे गलत बताया और इससे महंगाई बढ़ने की आशंका व्यक्त की है। हसला के पूर्व प्रधान सुशील कण्वा ने कहा कि आयकर की सीमा पुरुषों के लिए दो लाख, महिलाओं के लिए ढाई लाख और सीनियर सिटीजन्स के लिए तीन लाख होनी थी। आयकर की सीमा जो बढ़ाई गई है वह बहुत कम है।

वकीलों ने की सेवा कर की निंदा:-केंद्रीय बजट में वकीलों पर सेवा कर लगाने की कड़ी निंदा की गई है। पलवल बार एसोसिएसन के सदस्य शिवराम सौरोत व भूप सिंह सौरोत एडवोकेट ने उक्त फैसले की कटु आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वकील लोगों को न्याय दिलाते हैं, ऐसे में उन पर सेवा कर लगाना निंदनीय है। सौरोत ने कहा कि वकीलों का कार्य समाज सेवा के दायरे में आता है।वकील प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लोगों की सेवा करते हैं। लोगों को न्याय दिलाना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा सेवा कर लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा जिन लोगों की वकील करने की क्षमता नहीं होती है। ऐसे लोगों के केस वकील मुफ्त लड़ते हैं और उन्हें न्याय दिलाते हैं। साथ ही वकील न्याय पालिका का अहम हिस्सा है।सरकार ने वकीलों पर कर लगाकर उनके साथ कुठाराघात किया है। वकील समुदाय सरकार के फैसले का पुरजोर विरोध करता है और सरकार से फैसला तुरंत वापिस लेने की मांग करता है।

Monday, June 8, 2009

महिला सांसद पुरुषों से अधिक शिक्षित

नई दिल्ली। भारतीय महिला सांसद अपने पुरुष सहकर्मियों की तुलना में अधिक शिक्षित है और उनके चुनाव में विजयी होने की संभावना भी पुरुषों से अधिक है। एक नए अध्ययन के अनुसार पुरुषों की तुलना अधिक महिला सांसद परास्नातक डिग्रीधारी है।संसदीय शोध को समर्पित एक गैर लाभकारी संस्था 'पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च' के अध्ययन के अनुसार 15वीं लोकसभा की 59 महिला सांसदों में 32 प्रतिशत परास्नातक और शोध डिग्रीधारी है, जबकि पुरुष सांसदों में यह प्रतिशत 30 है। चुनाव में उम्मीदवार बनी 10 प्रतिशत महिलाएं विजयी हुई, वहीं केवल छह प्रतिशत पुरुष प्रत्याशी ही जीतने में सफल हुए।अध्ययन के अनुसार, इस बार लोकसभा में सबसे अधिक महिलाएं है और 545 सदस्यों में उनका प्रतिशत 11 है। राज्यसभा में 10 प्रतिशत और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या सात प्रतिशत है।सबसे अधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 29 प्रतिशत महिला सांसदों की संख्या 40 वर्ष के कम है। यह प्रतिशत पिछली लोकसभा से काफी बेहतर है, जिसमें 17 प्रतिशत महिला सांसद 40 वर्ष से कम उम्र की थीं। सभी 59 महिला सांसदों की औसत उम्र 47 वर्ष है, जो पुरुष सांसदों की औसत आयु 54 वर्ष से काफी कम है। किसी भी महिला सांसद की उम्र 70 वर्ष से अधिक नहीं है, जबकि सात पुरुष सांसद 70 साल से अधिक उम्र के है।पीआरएस के अनुसार 40 से 60 वर्ष के आयु समूह के बीच की महिला सांसदों का प्रतिशत इस बार काफी कम हुआ है। वर्ष 2004 में इस समूह की महिला सांसदों का प्रतिशत 73 था जो इस बार घटकर केवल 57 प्रतिशत रह गया। परंतु जहां 14 वीं लोकसभा में 60 वर्ष से अधिक की महिला सांसदों का प्रतिशत 9.8 था वहीं इस बार यह बढ़कर 13.8 प्रतिशत हो गया है।

बेरोजगार पिता ने की 5 बच्चों की हत्या

गाजियाबाद। गरीबी से तंग आकर गाजियाबाद में एक व्यक्ति ने अपने पांच बच्चों की कथित तौर पर हत्या करने और पत्‍‌नी को गंभीर रूप से घायल करने के बाद खुदकुशी की कोशिश की।पुलिस के मुताबिक गाजियाबाद की विजय नगर की रोजी कॉलोनी में रहने वाले 38 वर्षीय रवींद्र वर्मा और उसकी पत्‍‌नी दुर्गावती [35] को पड़ोसियो ने सोमवार सुबह सात बजे के आसपास घायल अवस्था में देखा जबकि दंपति के पांचों बच्चे अंजनी [14], प्रीति [10], मोना [8], देवराज [5] और नौ महीने के लकी का शव घर में पड़े थे।पड़ोसियों से सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने वर्मा और उनकी पत्‍‌नी को अस्पताल में भर्ती करवाया। दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। क्षेत्रीय अधिकारी आर. के. गौतम ने बताया, 'प्रथम दृष्टया यह अवसाद का मामला लगता है। वर्मा ट्रक चालक था अपने बयान में उसने कहा है कि पिछले दो महीने से वह बेरोजगार था। उसने पहले अपने बच्चों को मारा और फिर पत्‍‌नी एवं खुद को मारने का प्रयास किया।'

Friday, June 5, 2009

लश्कर का शीर्ष कमांडर दिल्ली में गिरफ्तार

नई दिल्ली : नेपाल में रहकर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों को संचालित कर रहा आतंकी मुहम्मद उमर मदनी गुरुवार को दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ गया। मदनी नेपाल में लश्कर का शीर्ष कमांडर था। उसके पास से पचास हजार के जाली नोट, आठ हजार यूएस डालर और नेपाली मुद्रा के साथ वहां बना ड्राइविंग लाइसेंस व फोन डायरी बरामद हुई है। पुलिस मदनी के दिल्ली आने के मंसूबों का पता लगाने में जुट गई है।दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के उपायुक्त आलोक कुमार के अनुसार जानकारी मिली थी कि नेपाल में भारत विरोधी गतिविधियां चला रहा लश्कर कमांडर मदनी दिल्ली आने वाला है। इस पर इलेक्ट्रानिक सर्विलांस के जरिए उस पर नजर रखी जा रही थी। पता चला कि वह नेपाल से अलीगढ़ के रास्ते दिल्ली आ गया है। इस पर पुलिस टीम ने गुरुवार शाम उसे कुतुबमीनार के मुख्य गेट के बाहर से गिरफ्तार कर लिया। उपायुक्त ने बताया कि मदनी के पास से पचास हजार के नकली नोट, आठ हजार यूएस डालर व चार हजार की नेपाली मुद्रा बरामद हुई है। इसके अलावा नेपाल का ड्राइविंग लाइसेंस, परिचय पत्र और टेलीफोन डायरी भी मिली है। डायरी में कई फोन नंबर तथा हवाला की जानकारी दर्ज है।उपायुक्त के अनुसार बरामद दस्तावेजों से पता लगाया जा रहा है कि मदनी राजधानी में किससे मिलने आया था। उसका यहां आने मकसद क्या था। सूत्रों के अनुसार मदनी मूल रूप से मधुबनी, बिहार का रहने वाला है। बीस साल से वह नेपाल में रह रहा था। पाकिस्तान में वह आतंकी प्रशिक्षण ले चुका है। वह नेपाल में लश्कर का शीर्ष कमांडर था। उसका काम पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत में आतंकियों को भेजना था। इसके अलावा वह नेपाल में लश्कर और हवाला का सारा काम देखता था। लश्कर के कोषाध्यक्ष जकीउर रहमान से भी वह लगातार संपर्क में था। मदनी को भारत के विभिन्न शहरों में लश्कर के स्लीपर माड्यूल्स तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया था।

Thursday, June 4, 2009

मेरे इतिहास का काला पन्ना है फिजा

पंचकूला। हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन उर्फ चांद मुहम्मद ने कहा कि फिजा मेरे इतिहास का काला पन्ना है। वह मनहूस है। जो पत्नी अपने पति पर दुष्कर्म का आरोप लगा सकती है उससे भला और क्या उम्मीद की जा सकती है। इस पूरे प्रकरण में वह अपने विधानसभा क्षेत्र कालका के लोगों से माफी मांगते हैं।

करीब आठ माह बाद विदेश से लौटे चांद ने बुधवार को अपने पंचकुला स्थित आवास पर पत्रकार वार्ता की। कहा कि उन्होंने वकील की सलाह के बाद ही अनुराधा बाली उर्फ फिजा को तलाक दिया है। अब उसका मुझसे कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं की पहले उन्हे फिजा से प्यार हो गया था। बाद में दोनों ने धर्म परिवर्तन करके निकाह भी किया। लेकिन जब फिजा ने उन पर दुष्कर्म का आरोप लगाया, तो वह बर्दाशत नहीं हुआ। इस पर उन्होंने फिजा से नाता तोड़ लिया। विदेश से फिजा को मोबाइल पर तीन बार तलाक कहकर अपने को उससे अलग कर लिया।चांद ने कहा कि जब से वह फिजा के साथ रहने लगे थे तब से वह आर्थिक रूप से कमजोर हो गए थे। घर चलाने के लिए उन्होने अपने मित्रों से उधार लिए। इस प्रकार एकत्रित की एक करोड़ 86 लाख रुपये की राशि घर छोड़ते समय फिजा को दे दी थी। उनके मन मे फिजा के प्रति कोई रंजिश होती तो वह उक्त राशि अपने साथ लेकर जा सकते थे। लेकिन उनका मन सच्चा था इसलिए उन्होंने फिजा को रुपये दिए। उन्होंने कहा कि फिजा उन पर जो आरोप लगा रही है वह एकदम निराधार हैं।एक सवाल के जवाब में चांद ने कहा कि वह फिजा समेत किसी के खिलाफ भी विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। बचपन से ही वह कांग्रेसी हैं। पार्टी का दामन वह कभी नहीं छोड़ेंगे। लेकिन यह भी कहा कि हरियाणा जनहित कांग्रेस [हजकां] ही असली कांग्रेस है। क्योंकि हरियाणा में कांग्रेस चौधरी भजन लाल के नाम से ही जानी जाती है। इस दौरान चांद ने फिजा को चुनौती दी कि वह अपने मुहल्ले में चुनाव लड़कर देख लें। यदि 25 प्रतिशत भी वोट हासिल कर लेती हैं, तो वह सदा के लिए राजनीति छोड़ देंगे।

तलवार से किये ताबड़तोड़ वार, पंजे काट डाले

चरित्र सन्देह को लेकर बुधवार प्रात: तीन बच्चों के पिता ने सुखेर स्थित एक देवरे ले जाकर अपनी पत्नी की तलवार से निर्मम हत्या कर दी। वारदात के बाद अभियुक्त ने स्वयं थाने जाकर समर्पण कर दिया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक शहीद भगतसिंह नगर निवासी सुरेश कुमार (२५) पुत्र गंगाराम प्रजापत आज तड़के करीब ५.३० बजे अपनी पत्नी मांगी बाई (२२) को मोटर साईकल पर सुखेर हाईवे रोड पर भैरूजी के देवरे नारियल चढ़ाने के बहाने ले गया था। जहां उसने पत्नी को बैठा दिया तथा वहां पहले से छिपाकर रखी तलवार निकाल कर पत्नी के सिर व गर्दन पर वार कर दिये। इस अप्रत्याशित हमले से मांगी बाई गिर पड़ी और उसके खून की धारा बह निकली इसके बाद भी युवक ने तलवार से वार करना जारी रखा। पैर व पीठ पर हमले के बाद उसने उसका काम तमाम कर डाला। यही नहीं उसने मांगी बाई के हाथों के दोनों पंजे भी काट डाले।
इस निर्मम हत्या के बाद अभियुक्त ने सीधे सुखेर थाने पहुंच आत्मसमर्पण कर दिया। जब उसने अपनी पत्नी की हत्या करने की बात कही तो स्वयं पुलिस भी भौचक्की रह गई। थानाधिकारी सुमेर सिंह मय जाब्ता अभियुक्त के साथ घटनास्थल पहुंचे जहां मांगी बाई की क्षत विक्षत लाश पड़ी थी। थानाधिकारी सुमेरसिंह ने तुरंत घटना की सूचना उच्चाधिकारियों को दी। जिस पर डिप्टी (पश्चिम) गोपालंिसंह राठौड़ भी घटनास्थल पहुंचे तथा मौका मुआयना किया। पुलिस ने लाश को मुर्दाघर रखवाया। सूचना पर मृतका के ननिहाल पक्ष के लोग भी मुर्दाघर पहुंच गये थे। पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से मृतका का पोस्टमार्टम करा लाश परिजनों को सुपुर्द की।

Tuesday, May 12, 2009

भुवनेश्वर की दो छात्राओं को नासा का अवार्ड

भुवनेश्वर। अमेरिका के नेशनल एयरोनाटिक्स स्पेस ऐडमिनिस्ट्रेशन यानी नासा के स्पेस सेटलमेंट डिजाइन कांटेस्ट-2009में उड़ीसा की दो छात्राओं को सर्वोच्च सम्मान मिला है। ये छात्राएं स्थानीय सेंट जेवियर हाईस्कूल, केदारगौरी और बीजेबी जूनियर कालेज की हैं। 14 देशों के 875 छात्रों ने अंतरिक्ष विज्ञान संबंधी जागरूकता को लेकर 309 प्रकल्पों में उक्त प्रतियोगिता भाग लिया था। इसमें सर्वोच्च पुरस्कार स्वस्तिका भट्टाचार्य और पूजा भट्टाचार्य को मिला है।उक्त दोनों बहनों के प्रकल्प: ओरिशान डिजाइन इनस्पायर्ड सिस्टम एंड एयरो व्हेकिल्स को सर्वोच्च पुरस्कार मिला है। इनके साथ कनाडा के एरिक याम को संयुक्त रूप से यह सम्मान मिला है।दोनों छात्राओं द्वारा उड़ीसा के परशुरामेश्वर, मुक्तेश्वर और लिंगराज मंदिर के स्थापत्य की तर्ज पर एक वक्राकार विमान तैयार कर उसे अंतरिक्ष में भेजने का प्रकल्प तैयार किया गया था। इस बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए इनके गाइड डा. दीपक भट्टाचार्य ने कहा कि संपूर्ण मौलिक विचारधारा को लेकर इन छात्राओं ने चक्राकार मंदिर के ढांचे में राकेट बनाया है। इसका नाम गजराज रखा गया है। राकेट के ऊपरी हिस्से में अकबर तथा निचले हिस्से में महायान के अंतर्गत ईधन की व्यवस्था की गई है। गाइड ने कहा की गजराज एक वजनदार प्रक्षेपक होने के कारण अंतरिक्ष यान को चंद्रमा तक पहुंचाने में मददगार साबित होगा। इन छात्राओं के प्रकल्प को उच्च स्तरीय प्रकल्प बताया जा रहा है।

आरुषि की बरसी मना तलवार दंपती ने छोड़ा घर

नोएडा । आरुषि हत्याकांड की गुत्थी एक वर्ष बाद भी नहीं सुलझ सकी। लेकिन इसके जख्म अब भी उनके दिलों में हरे हैं, जिनसे संदेह के आधार पर पूछताछ की गई। भले ही किसी पर आरोप साबित न हो सका, लेकिन उन्हें किसी न किसी रूप में आज भी परेशानी उठानी पड़ रही है। आरुषि के माता-पिता तलवार दंपती तो इतना अधिक आहत हुए कि जिस घर में बेटी की याद बसी थी, उसे छोड़ गए।आरुषि के माता-पिता डा. राजेश तलवार और डा. नूपुर तलवार ने नोएडा स्थित एल-32 मकान को हमेशा के लिए छोड़ दिया। वह रहने के लिए दिल्ली चले गए। घर छोड़ने से पहले आरुषि की आत्मा की शांति के लिए दस दिनों पहले यहां उसकी बरसी पर पूजा अर्चना कराई। इसमें खास दोस्तों एवं परिजनों को बुलाया गया। ज्ञात हो कि बेटी के कत्ल के आरोप में जेल से रिहा होने के बाद डा. राजेश तलवार पत्नी नूपुर के साथ काफी दिनों तक एल-ब्लाक स्थित अपनी ससुराल में रहे। कुछ दिनों बाद वह दिल्ली रहने चले गए। इस बीच कभी-कभी इनका एल-32, सेक्टर 25 स्थित घर पर भी आना-जाना लगा रहता था। जिस घर में उन्होंने अपनी बेटी को खोया था, उसमें उनका कभी दिल नहीं लगा।दूसरी ओर, आज भी लोग डाक्टर तलवार के तीनों नौकरों को शक की निगाह से देखते हैं। उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई हो या सीबीआई के पास उनके खिलाफ कोई सबूत न हो, लेकिन बहुत से लोग उन्हें ही दोषी मानते हैं। आरुषि हत्याकांड में डा. तलवार के कंपाउंडर कृष्णा को शामिल मानते हुए गिरफ्तार किया, लेकिन साबित नहीं कर सकी। उसके जीजा भीम बहादुर थापा का कहना है कि कृष्णा की जिंदगी पूरी तरह से तबाह हो गई है। नौकरी की तलाश में वह आज भी दर-दर की ठोकरें खा रहा है। यही हाल डा. दुर्रानी दंपती के नौकर राजकुमार का भी है। जेल से छूटने के बाद वह नेपाल लौट चुका है। उसके चचेरे भाई महेंद्र का कहना है कि नेपाल में उसने नौकरी की काफी तलाश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उधर डा. तलवार के पड़ोसी का नौकर विजय मंडल भी जेल से छूटकर झारखंड चला गया।आरुषि हत्याकांड के वक्त डा. तलवार के घर के आसपास के फ्लैट में काम करने वाले ज्यादातर नौकर व ड्राइवर सीबीआई की पूछताछ के डर से शहर छोड़कर चले गए। जो बचे हैं वो भी दहशत में हैं। कोई भी नया नौकर या ड्राइवर यहां काम करने को तैयार नहीं है। एल 28 का ड्राइवर गजराज भी सीबीआई के पूछताछ करने के बाद ही नौकरी छोड़कर गया था। एक और नौकर जयवीर का कहना है कि हत्याकांड के बाद इस जगह से अपनत्व का भाव ही खत्म हो गया है। मजबूरी में काम करने आना पड़ता है।

आरुषि हत्याकांड-एक नजर में

-16 मई : सुबह डीपीएस छात्रा आरुषि का शव एल 32, सेक्टर 25 स्थित उसके कमरे में मिला। नौकर हेमराज के गायब होने पर पुलिस ने हत्या का शक उस पर जताया

-17 मई : 24 घंटे बाद ही नौकर हेमराज का शव छत पर मिला। सेक्टर-20 थाना प्रभारी और एसपी सिटी का तबादला। एसटीएफ भी जांच में शामिल

-23 मई : आरुषि के पिता डा. राजेश तलवार को दोहरे हत्याकांड का दोषी बताते हुए नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया। मेरठ रेंज के आईजी ने कहा कि आरुषि को नौकर हेमराज के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखकर डा. तलवार ने उसकी हत्या की

-एक जून : सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की। आईजी, डीआईजी व एसएसपी का तबादला

-13 जून : नार्को टेस्ट के बाद सीबीआई ने डा. तलवार के कपाउंडर कृष्णा को गिरफ्तार किया

-27 जून : डा. अनीता दुर्रानी का नौकर राजकुमार गिरफ्तार

-11 जुलाई : सीबीआई ने विजय मंडल को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। पर्याप्त सुबूत न होने के कारण डा। तलवार को पचास दिन बाद मिली जमानत-9 सितंबर : सीबीआई ने कहा कृष्णा, राजकुमार व विजय मंडल के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं। चार्जशीट दाखिल करने से इन्कार


-12 सितंबर : कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को मिली जमानत।

प्रधानमंत्री के बयान पर भड़के सिख

नई दिल्ली: दिल्ली में हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल गया। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने सोमवार को पंजाब में कहा था कि सिख समाज '84 के सिख विरोधी दंगों को भूल जाए। इस मामले का पटाक्षेप हो चुका है। इस बयान से विरोधियों, खासकर शिरोमणि अकाली दल को एक मुद्दा मिल गया है। चूंकि बुधवार को पंजाब में मतदान होना है, इसलिए विरोधी दल इसे हर हाल में भुनाना चाहता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री के इस बयान को शिरोमणि अकाली दल ने तूल दे दिया। साथ ही प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी शिअद नेता व समर्थक डा. मनमोहन सिंह के खिलाफ आग उगल रहे थे। भड़के सिखों ने प्रधानमंत्री को कातिलों का सरदार तक कह डाला।उनका कहना था कि आज सिख होकर प्रधानमंत्री सिखों के कत्लेआम को भुलाने की बात कर रहे हैं। क्या देश को कहेंगे 1947 को भूल जाएं। दंगे में निर्दोष सिख मारे गए थे, किसी का सुहाग उजड़ा तो कई बच्चा यतीम हो गए। डा. मनमोहन सिंह के परिवार या उनके रिश्तेदार इस दंगे के शिकार नहीं हुए इसलिए वह इसे भुलाने की बात कर रहे हैं। अकाली दल के नेता कुलदीप सिंह भोगल, अवतार सिंह हित, जसवीर सिंह काका व महेंद्र पाल सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मानवता व धर्म भूलकर कुर्सी को प्राथमिकता दे रहे हैं। '84 में सिखों का कत्लेआम देश हमेशा याद रखेगा। इसे देश के इतिहास में हमेशा काले अक्षरों में याद किया जाएगा। कत्लेआम की अगुवाई करने वाले जगदीश टाइटलर को सरकार बचा रही है। उन्हें सजा मिलनी चाहिए।

भाजपा ने भी की बयान की आलोचना

प्रधानमंत्री के सिख विरोधी दंगों को भुलाने के बयान की भारतीय जनता पार्टी ने भी आलोचना की। प्रदेश के महामंत्री आरपी सिंह ने कहा कि ऐसा कह कर प्रधानमंत्री ने पद की गरिमा धूमिल की है। साथ ही उन्होंने परोक्ष रूप से भारत की न्यायपालिका पर दबाव भी बनाया है। उन्होंने कहा कि जब '84 के दंगों को सिख कौम भूल सकता तो जालियांवाला बाग में जनरल डायर द्वारा सिखों को गोलियों से उड़ाने की घटना को भी भूल गया होता।

Tuesday, March 31, 2009

गेहूं पर स्टॉक सीमा हटी, खाद्य तेल और चावल पर रहेगी जारी

केंद्र सरकार ने गेहूं पर लगी स्टॉक सीमा को हटा दिया है जबकि चावल और खाद्य तेलों पर लगी स्टॉक सीमा की अवधि को इस साल 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को हुई मंत्रीमंडल की बैठक के बाद इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि अक्टूबर में इस फैसले की समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने बताया कि सरकार के इस फैसले से बाजार में इन जिंसों की आवक बढ़ेगी, जिससे भाव में और कमी आएगी। गौरतलब है कि जमाखोरी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने डेढ़ साल पहले गेहूं पर स्टॉक सीमा लगा दी थी। बाद में तिलहनों और खाद्य तेलों के स्टॉक की भी सीमा तय कर दी गई थी। इस साल मार्च के अंत में इसकी अवधि समाप्त होने पर केंद्र ने जहां खाद्य तेलों और चावल पर लगी स्टॉक सीमा को 30 सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। वहीं गेहूं पर लगी स्टॉक सीमा को हटा दिया है। रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की सचिव वीना शर्मा के मुताबिक स्टॉक लिमिट की वजह से फ्लोर मिलें किसानों से भारी मात्रा में गेहूं की खरीद नहीं कर पाती। लेकिन अब मिलों को गेहूं खरीदने में सहुलियत होगी जिससे घरलू बाजार में कीमतें भी नीचे आ सकेंगी। पिछले साल की तरह इस साल भी गेहूं का बंपर उत्पादन होने से भंडारण की समस्या आड़े सकती है। इस वजह से भी सरकार को यह फैसला लेना पड़ा है। आटा चक्की वालों द्वारा ज्यादा मात्रा में गेहूं की खरीद करने से सरकार को भंडा़रण में आसानी हो सकती है।
मौजूदा समय में स्थानीय बाजारों में गेहूं का भाव करीब 1150-1160 रुपये `िं टल है। अखिल भारतीय अनाज निर्यात संघ के अध्यक्ष डी पी सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में सरकार के पास गेहूं का पर्याप्त भंडार है, लिहाजा अब बाजार में जमाखोरी के आसार नहीं हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस समय सरकार के पास करीब 2.126 करोड़ गेहूं और 1.528 करोड़ टन चावल का स्टॉक मौजूद है। पिछले साल सरकारी एजेंसिंयों ने करीब 2.26 करोड़ टन गेहूं और 2.849 करोड़ टन चावल की खरीद की थी। इस साल भी इसी मात्रा में अनाजों की खरीद होने की संभावना है। खाद्य तेलों पर लगी स्टॉक सीमा को बढ़ाने का कीमतों पर असर पड़ने के आसार नहीं हैं।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने बताया कि पिछले महीनों के दौरान खाद्य तेलों की कीमतों में काफी गिरावट आ चुकी, सस्ते आयात की वजह से भाव में इजाफे के आसार नहीं हैं। इसके अलावा, सीसीईए ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में चल रही योजनाओं को चालू पंचवर्षीय योजना के दौरान जारी रखने की अनुमति दे दी है। साथ ही, अन्य योजनाओं को भी जारी रखने पर मोहर लगा दी है। इसके लिए फ्क्क्त्त-फ्क्ख्फ् के दौरान बागवानी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए ख्99.म्ब् करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे। आईसीएआर के अंतर्गत चल रही सभी योजनाओं का क्रियान्वयन पहले के अनुसार भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बंगलुरु द्वारा ही किया जाएगा।

Friday, March 27, 2009

बेवफा होती हैं खूबसूरत महिलाएं!

लंदनः खूबसूरत पार्टनर की तमन्ना रखने वालों के लिए बुरी खबर है ! सुंदर महिलाएं अक्सर बेवफा होती हैं

? यह हम नहीं कह रहे , बल्कि ब्रिटेन में हुई एक स्टडी के कुछ यही रिजल्ट हैं।

हालांकि यह बात हर किसी पर फिट नहीं बैठती , लेकिन स्टडी में पाया गया कि अधिकांश खूबसूरत महिलाओं के अवैध संबंध थे। उनकी इस बेवफाई की वजह एक हार्मोन है। रिसर्चर्स ने स्टडी में पाया कि जिन महिलाओं में ओस्ट्रोजन हॉर्मोन की मात्रा अधिक होती है , वह न केवल खूबसूरत होती हैं बल्कि थोड़ी बेवफा भी होती हैं। स्टडी के मुताबिक इस तरह की महिलाओं के काफी लोगों से संबंध होते हैं और वे अक्सर नए संबंध बनाने के लिए तैयार रहती हैं।रिसर्चर्स के मुताबिक अपनी खूबसरती के कारण ऐसी महिलाएं पुरुषों को आसानी से आकर्षित कर लेती हैं। रीसर्च से जुड़ीं टैक्सस यूनिवर्सिटी की डॉ. क्रिस्टीना कहती हैं ,' यदि ऐसी महिलाओं को अच्छे मर्द नजर आते हैं , तो वह अपने पार्टनर के प्रति वफादारी कम ही दिखाती हैं। '

महंगी कार से आओगे तो सीधे दिल में उतर जाओगे

लंदन ।। अगर आप शानदार क

ार
में सफर करते हैं तो किसी भी हसीना के दिल तक पहुंचने में आप ज़्यादा वक्त नहीं लगाएंगे। जी हां , यह हम नहीं कह रहे बल्कि यह एक ताज़ा स्टडी की हकीक़त है। स्टडी बताती है कि अगर पुरुष किसी लकदक कार में जलवा बिखेरता है तो वह बड़ी आसानी से किसी भी हसीना का दिल जीत लेता है। यूनिवर्सिटी ऑफ वेल्स के मनोविज्ञानियों ने एक महिला और पुरुष को बारी - बारी से सिल्वर बेंटले कॉन्टिनेंटल कार और फिर रेड फोर्ड फिएस्टा में सफर कराया।

ऐश नहीं, कटरीना बनेंगी बार्बी डॉल

मुंबई में होने जा रहे फैशन वीक
में
कटरीना बार्बी डॉल बनकर रैंप पर उतरेंगी। यह पहली बार है कि कोई इंडियन ऐक्ट्रिस बार्बी डॉल के आउटफिट में नज़र आएंगी। पहले बार्बी डॉल के लिए ऐश का नाम लिया जा रहा था। बार्बी के 50 वें जन्मदिन पर सभी डिज़ाइनरों को बार्बी के आउटफिट डिज़ाइन किए जाने का मौका दिया जा रहा है। बाद में अंतिम विनर को बार्बी डॉल के आउटफिट डिजाइन का मौका दिया जाएगा। फिल्म स्टार कटरीना कैफ इस बार्बी शो की शो स्टॉपर बनेंगी। कैट इस मौके पर काफी खुश दिखीं। कैट ने कहा , ' हर लड़की कभी न कभी बार्बी डॉल के साथ खेलती है। इसलिए बार्बी डॉल के आउटफिट में आकर मैं खुश हूं। ' न्यू यॉर्क में मर्सिडीज़ बेंज फैशन वीक में प्रदर्शन के बाद बार्बी अपने 50 वें जन्मदिन पर शुक्रवार को भारत के सबसे बड़े फैशन इवेंट में रैंप पर उतरेगी।

Thursday, March 19, 2009

शिमला में छह मूक बधिर छात्राओं के साथ दुष्कर्म

अंकुर वत्स
शिमला : शिमला की एक स्वयं सेवी संस्था 'प्रेरणा वेल्फेयर एसोसिएशन' के टूटू सेंटर में 6 मूक बधिर छात्राओं के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। लड़कियों के साथ यह सब पिछले एक-डेढ़ साल से चल रहा था। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ धारा 376 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पीड़ित लड़कियों को मेडिकल के लिए भेज दिया गया है। दुष्कर्म का यह आरोप संस्थान के समन्वयक-प्राचार्य के अलाव तीन शिक्षकों पर है। दुष्कर्म की शिकार बच्चियां 13 से 21 आयु वर्ग की है।केंद्र में कुल 27 विशेष बच्चे हैं जिनमें से 22 हास्टल में रहते हैं जबकि पांच रोज घरों से आते हैं।पुलिस सूत्रों के अनुसार पीड़ित लड़कियों के साथ पिछले एक साल से उक्त शिक्षक इन लड़कियों के साथ दुष्कर्म करते आ रहे थे। खुलासा तब हुआ जब एक लड़की ने अपने घर पर यह जानकारी दी। लड़की के परिजनों ने इस बारे में पुलिस को शिकायत की जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बुधवार को संस्थान के समन्वयक एवं प्राचार्य विजय कुमार व दो अन्य ट्रेनरों अमरजीत व दिनेश को गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपी बिलासपुर जिले के घुमारवीं के रहने वाले हैं। चौथे आरोपी विनोद को सरकाघाट (मंडी) में उसके घर से गिरफ्तार किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तथ्यों को जुटाने के लिए फॉरेसिक लैब जुन्गा की टीम मौके पर पहुंच गई थी।

उक्त स्वयंसेवी संस्था टूटू में अक्षम बच्चों की पढ़ाई के लिए 2004 से केन्द्र चला रही है जहां कुल 27 अक्षम लड़के-लड़कियां हैं। इनमें 12 लड़कियां लड़कियां ठियोग, अर्की, हीरानगर व सुन्नी क्षेत्र की हैं जिनमें से 11 हास्टल में रहती हैं। एक लड़की कसुम्पटी से हर रोज उक्त सेंटर में पढ़ाई के लिए जाती है। अक्षम बच्चों को पढ़ाई करवाने के लिए ंप्रेरणा संस्था को सर्वशिक्षा अभियान के तहत यह प्रोजेक्ट मिला है और 20 बच्चों के लिए प्रतिमाह 30 हजार रुपये मिलते है। एसपी शिमला आरएम शर्मा ने बताया कि टूटू में हुए दुष्कर्म के मामले में मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़ित लड़कियों का मेडिकल करवा दिया गया है और मामले की छानबीन की जा रही है। उधर, मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने स्वयं सेवी संस्था प्रेरणा वेल्फेयर एसोसिएशन के टूटू सेंटर में 6 लड़कियों के साथ हुए यौन शोषण के मामले में सभी दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटना पर दु:ख जताते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है व सभी दोषियों को पकड़ा जा चुका है। उनके मुताबिक सरकार इस मामले में तत्काल कार्रवाई की है।

बेटियों से बलात्कार के आरोप में बिजनसमैन गिरफ्तार

मुम्बई के एक बिजनसमैन ने अपनी ही दो बेटियों का हवस का शिकार बनाया और वह लगातार नौ साल से अपनी बडी बेटी का यौन शोषण करता रहा। इस पूरे मामले में दोनों लडकियों की मां ने भी अपने पति का विरोघ नहीं किया और इस पूरे अपराघ में उसकी स्वीकृति रही। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बिजनसमैन ने यह सब एक तांत्रिक के कहने पर किया।
मुम्बई के मीरा रोड पुलिस ने बलात्कारी पिता के साथ लडकियों की मां और तांत्रिक को गिरफ्तार कर लिया है। मीरा रोड पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर मुकुद महाजन ने पत्रकारों को बताया कि गुजराती मूल का यह बिजनसमैन अंघेरी में रेडियम प्लेट्स बनाने की यूनिट चलाता है। बिजनसमैन 2000 में एक तांत्रिक के सम्पर्क में आया। उस तांत्रिक ने सलाह दी कि वह अपनी बेटी से यौन संबंघ बनाए तो उसके घर में समृद्धि आ जाएगी। तांत्रिक के बहकावे में आकर उसने अपनी बडी बेटी को हवस का शिकार बनाना शुरू कर दिया, उस समय उसकी उम्र करीब 12 साल थी। इसके बाद से वह लगातार अपनी बडी बेटी का यौन शोषण करता रहा। बिजनसमैन अपनी बडी बेटी का 2000 से लगातार यौन शोषण करता आ रहा था। हाल ही में उसने अपनी 15 वर्षीय छोटी बेटी के साथ भी कुकर्म किया। उसके बाद बडी बेटी का भी सब्र टूट गया और उसने यह बात अपनी नानी और मामा को बताई। इन दोनों के साथ दोनों बहनों ने बलात्कारी पिता और तांत्रिक के खिलाफ मीरा रोड थाने में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।