Monday, October 19, 2009

हत्या के बाद युवक को जलाया

छावला इलाके में एक व्यक्ति की ईंट व चाकू मारकर हत्या कर दी गई और फिर कार सहित उसे जला दिया गया। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो शव पूरी तरह से जल चुका था। जांच में पुलिस को पता चला कि मामला हत्या का है। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच करने के बाद आरोपी राकेश (21) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि मृतक राजेश उसकी मां से मेल-जोल रखता था। इस पर उसे आपति थी।
पुलिस के अनुसार शुक्रवार की देर रात घुम्मन हेड़ा रोड के पास एक सेंट्रो कार में आग लगने की सूचना मिली थी। मौके पर पुलिस के पहुंचने से पहले आग को बुझाया जा चुका था। कार में सीटों के बीच एक व्यक्ति का शव पूरी तरह से जली अवस्था में पड़ा हुआ था। जांच के दौरान पता चला कि यह कार नंग्ली सकरावती में रहने वाली एक महिला के नाम पर है और उसका बेटा राजेश (39) गाड़ी लेकर गया था। वह इलाके का घोषित अपराधी था। आगे छानबीन करने पर पुलिस को पता चला कि राजेश का एक महिला से काफी मेलजोल था। वह अकसर उससे मिलने के लिए जाता था।इस पर महिला के बेटें आपति करते थे। छानबीन करने के बाद पुलिस ने महिला के बेटे राकेश को गिरफ्तार कर लिया। उसने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह राजेश को कई बार घर नहीं आने की चेतावनी दे चुका था। लेकिन वह मानता नहीं था। इसलिए शुक्रवार की रात वह राजेश के साथ गया और दोनों ने शराब पी। शराब पीने के बाद राकेश ने पहले ईंट से और फिर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर राजेश की हत्या कर दी। हत्या करने के बाद राजेश की पहचान मिटाने के लिए उसने सीट का कंवर फाड़ा और फिर गाड़ी में आग लगा दी थी। पुलिस उससे आगे पूछताछ कर रही है।

Saturday, October 10, 2009

हत्यारी पंचायतें

अजय प्रकाश

हर महीने आठ से दस प्रेमियों की हत्या करने वाली मध्ययुगीन बर्बर खाप पंचायतों के खिलाफ हरियाणा में मुकदमा दर्ज करने का इतिहास नहीं है।

मान-सम्मान के नाम पर बलात्कार, हत्या, बेदखली, सामाजिक बहिष्कार और आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाली इन पंचायतों का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में है जिन्हें देखकर तालिबान की याद आती है। हरियाणवी समाज में सदियों से पैठी इन तालिबानी मान्यताओं के पूजकों से आधुनिक मूल्यों के साथ खड़ा हो रहा नया समाज थर्राता है।
हरियाणा में पहली बार खाप के एक नेता को एक हत्याकांड के सिलसिले में जेल भेजा गया है। करनाल जिले के बनवाला खाप के नेता सतपाल को मातौर गांव के वेदपाल हत्याकांड मामले में गिरफ्तार किया गया है। हालांकि खाप पंचायत के खिलाफ मुकदमा दर्ज न कर पुलिस ने पंचायत को कटघरे में खड़ा होने से हमेशा की तरह फिर एक बार बचा लिया है। फिर भी न्यायालय कानून बनाने के लिए उसी राज्य का मुंह ताक रहा है जिसकी विधानसभा में खाप पंचायतों का सरेआम समर्थन करने वाले प्रतिनिधि बैठे हुए हैं।
राज्य के कानून विशेषज्ञों के मुताबिक छोटी अदालतों से लेकर हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी प्रेमी युगलों की सुरक्षा के आदश से आगे बढ़कर पंचायतों को अवैध घोषित करने या पंचायत सदस्यों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने के बारे में स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं दिये हैं। यहां तक कि प्रेमी युगलों की हत्याओं और सुरक्षा को लेकर पिछले वर्ष उच्च न्यायालय द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने भी जारी अपनी रिपोर्ट में ऐसा कोई सुझाव नहीं दिया है जिससे खाप या जातिगत पंचायतों के तालिबानी फरमानों पर सीधी चोट हो सके।
कमेटी के सदस्य और चंडीगढ़ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ स्थाई अधिवक्ता अनुपम गुप्ता का जवाब है, ‘मैंने जानबूझकर चर्चा नहीं की। सिर्फ जातिगत पंचायतों पर सवाल खड़ा करने से समस्या खत्म नहीं होने वाली।’ कई वकीलों से बातचीत में पता चला कि खाप पंचायतों पर इसलिए मुकदमा नहीं दर्ज किया जा सकता है कि संकट के समय उनकी एक सहयोगी भूमिका होती है। अगर इस आधार पर हम खापों को जायज ठहरायेंगे तो तालिबान के विरोध में कैसे खड़े हो पायेंगे।
कमेटी ने अपने बचाव में यह भी कहा कि कमेटी के गठन होने तक खापों के सीधे हस्तक्षेप जैसे मामले उजागर नहीं हुए थे। लेकिन सच्चाई यह है कि 27 जून 2008 में जब कमेटी का गठन हुआ तो उससे 36 दिन पहले 9 मई को बला गांव में कालीरमन खाप के आदेश पर प्रेमी जोड़े जसबीर और गर्भवती सुनीता की हत्या कर दी गयी थी। इसी तरह 2 अप्रैल को कमेटी की रिपोर्ट पेश होने से 20 दिन पहले 12 मार्च को करनाल जिले के मातौर गांव में बनवाला खाप ने वेदपाल और सोनिया को अलग होने का फरमान सुना दिया था। बाद में 26 जुलाई को वेदपाल की हत्या कर दी गयी।
इसी तरह अगस्त महीने में झज्जर जिले के धाड़ना गांव में रवींद्र और शिल्पा को भाई- बहन बनाये जाने के पक्ष में कादयान खाप का अगस्त के मध्य में चार दिनों का धरना चला। धरने में यह अभूतपूर्व था कि महिलाएं भी शामिल थीं। घोर स्त्री विरोधी इन खाप पंचायतों में महिलाओं का शामिल होना एकदम नयी घटना थी। सैकड़ों की संख्या में पुलिस ड्यूटी बजा रही थी कि कहीं पंचायत रवींद्र के घर में घुसकर आग न लगा दे, हत्या न कर दें। लेकिन किसी पंचायत प्रतिनिधि के खिलाफ इस मामले में कोई मुकदमा नहीं दर्ज हुआ।

हरियाणा पुलिस महानिदेशक विकास नारायण राय भी मानते हैं कि ‘पंचायतों पर शिकंजा कसने के मामले में कोताही बरती जाती रही है।’ पुलिस महानिदेशक को ‘प्रेमी सुरक्षा घर’ योजना से काफी उम्मीदें हैं। उल्लेखनीय है कि हरियाणा पुलिस ने प्रेमी जोड़ों को हत्यारों से बचाने के लिए ‘सेफ होम’ बनाने की घोशणा की है जिसकी देखरेख सीधे पुलिस के हाथों में होगी। लेकिन सवाल है कि हथियारों से लैस दस पुलिस वाले जब कादयान खाप के हमलावरों से वेदपाल को मरने से नहीं बचा सके तो वही पुलिसकर्मी उन घरों को खापों के हमले से कितना सुरक्षित रख पायेंगे। और इससे बड़ी बात है कितने दिन प्रेमी जोड़े गांव-घर से दूर ‘सेफ होम’ में जी पायेंगे।
इन मानवाधिकारों की रक्षा करने वाला दफ्तर ‘मानवाधिकारआयोग’ हरियाणा में नहीं है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शब्दों में,‘राज्य में ऐसे आयोग की आवश्यकता नहीं है।’ हां राज्य में महिला आयोग जरूर है जिसकी अध्यक्ष कांग्रेसी नेता सुशीला शर्मा हैं। खापों के खिलाफ आयोग ने किस तरह की कार्यवाई किये जाने की राज्य से सिफारिश की है, उनका जवाब था, ‘टेलीफोन न पर मैं थानों और अधिकारियों को राय सुझाती रहती हूं। महिला आयोग खापों पर शोध कर रहा है। शोध पूरा होने पर फैसला होगा।’
मुख्यमंत्री मानवाधिकार आयोग की जरूरत महसूस नहीं करते, महिला आयोग खापों पर शोध करवा रही है और अदालत की गठित कमेटी की रिपोर्ट में खाप और जातिगत पंचायतों पर कार्यवाही का जिक्र ही नहीं आता। वैसे में जीवनसाथी चुनने का अधिकार हरियाणा में कहां से मिलेगा?

दिल्ली पुलिस का इंसाफ

अजय प्रकाश
गुस्से और बौखलाहट से भर देने वाली ये तस्वीरें आपने देख ली होंगी। ये तस्वीरें दिल्ली प्रेस की अंग्रेजी पत्रिका कारवां से जुड़े पत्रकार जोएल इलिएट की हैं। इससे मिलती-जुलती तस्वीरें हमने इराक के अबू गरेब जेल की देखी थीं। लेकिन यह जेल की नहीं, दिल्ली के सड़कों के जेल बन जाने की बाद की हैं।
पुलिसिया काम के इस नमूने को हम इसलिए देख पा रहे हैं कि यह एक अमेरिकी पत्रकार के साथ किया गया इंसाफ है। पत्रकार जोएल इलिएट पत्रिका कारवां के साथ मई महीने से जुड़े हुए थे। इससे पहले वे न्यूयार्क टाइम्स, द क्रिष्चियन सांइस मानिटर, सैन फ्रांसिस्को, क्राॅनिकल और ग्लोबल पोस्ट के स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर काम करते रहे हैं।
दिल्ली के जंगपुरा की सड़कों पर पुलिस द्वारा पीटे जा रहे एक आदमी को बचाने के चक्कर में खुद षिकार हो गये जोएल फिलहाल अपने देष अमेरिका लौट गये हैं। हमें तो खुषी है वे बेचारे भारत के नहीं हैं, उपर से हिंदी के तो बिल्कुल भी नहीं। नहीं तो पुलिस वाले धमकाकर चुप करा देते, नहीं मानने पर मीडिया घराने का मालिक नौकरी से निकाल देता और बात अगर इससे भी नहीं बनती तो लड़कीबाज, दलाल या रैकेटियर बनाकर रगड़ देते। मौका तो रात का था ही जिसमें यह सब आसान होता।
यहां राहत है कि कारवां पत्रिका के प्रबंध संपादक अनंत नाथ और अमेरिकी दुतावास वाले इस मामले को गंभीरता से उठा रहे हैं। रही बात बिरादरों की तो, सब पूछ रहे हैं कि हम क्या कर सकते हैं......

Monday, July 6, 2009

जनता के लिए खास नहीं रहा बजट

केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की ओर से सोमवार को पेश किया गया बजट जनता के लिए खास नहीं रहा। उसे बजट में खास जगह नहीं मिली। बजट में विभिन्न टैक्स को कम करने पर जहां खास जोर दिया गया, वहीं उद्योगों की मंदी को लेकर किसी बड़े पैकेज का ऐलान नहीं किया गया। उद्योगपतियों का कहना है कि सरकार ने टैक्स तो कम कर दिए मगर मंदी से उबरने के लिए कोई बड़ा पैकेज नहीं दिया।बजट में आम वस्तुओं में सरकार ने मोबाइल, वाटर प्यूरीफायर, केबल वायर, ब्रांडेड ज्वेलरी, एलसीडी स्क्रीन आदि के दाम कम किए हैं, वहीं महंगाई को देखते हुए इस बार आम उपभोक्ता वस्तुओं मंे कोई गिरावट नहीं हुई। बुद्धिजीवियों ने बजट को मिला-जुला करार दिया है। उनका कहना कि सरकार ने इस बार सिर्फ टैक्स पर खास ध्यान दिया है। इसमें सरचार्ज, फ्रिंज टैक्स, कापरेरेट टैक्स को हटा दिया गया।

कर्मचारियों का वेतन स्तर बढ़ा :- चार्टर्ड एकाउंटेंट तरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि इस बजट से कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी होने की संभावना है। मिनिमम वेजेज निर्धारित करने से श्रमिकों को इस बजट से काफी राहत मिल सकती है।अभी मेहनत के बाद भी उन्हें सही वेतन नहीं मिल पाता है। आईसीएआई के प्रधान एसके बंसल ने बजट को मिला-जुला बताया। बजट में फ्रिंज बेनेफिट टैक्स को हटाने का उन्होंने स्वागत किया। माल भाड़े पर सर्विस टैक्स लगाने को उन्होंने गलत बताया।

निराशाजनक रहा आम बजट :- रीयल स्टेट से जुड़े दिव्यंेदु शेखर ने बजट को निराशाजनक बताया। उनका कहना है कि निर्माण के क्षेत्र मंे सरकार ने कोई पैकेज नहीं दिया। इससे मंदी को खत्म होने में समय लगेगा। उद्योगपति शंकर शर्मा का कहना है कि बजट से उद्योगों को खास फायदा नहीं होने वाला। हालांकि अन्य क्षेत्रों में शिक्षा और कृषि में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

बिजली पर नहीं दिया गया ध्यान :- चार्टर्ड एकाउंटेंट संगीत कुमार गुप्ता और संजीव गुप्ता का कहना है कि सरकार को बिजली के मामले में कुछ प्रभावकारी कदम उठाने चाहिए। उद्योगों को इस समस्या से भारी नुकसान हो रहा है। जिले में लगातार बिजली की कमी ने सभी के लिए समस्या पैदा कर रखी है। बजट में बिजली स्रोत को बढ़ाने के कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।

पेट्रो पदाथरें के बढ़े रेट वापस लिए जाएं :- विज्ञापन एजेंसी में काम करने वाले ऋषि का कहना है कि मोबाइल के दाम कम करने से क्या होगा। मोबाइल तो पहले से ही सस्ते थे। सरकार को ईधन के बढ़ाए दामों को वापस लेना चाहिए था। सरकार को महंगाई दर कम करनी चाहिए। हालांकि छात्रों के लिए नई केंद्रीय यूनिवर्सिटी की निर्माण योजना अच्छा कदम है।वहीं मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़ी सोनिया का कहना है किसरकार को खाद्य और घरेलू सामानों के दामों में और कमी लानी चाहिए थी। इससे गरीब तबके को राहत मिलती।डाक्टर और वकीलों के ऊपर सर्विस टैक्स लगाने को लेकर दोनों वर्ग ने निराशा जाहिर जताई है। आईएमए के अध्यक्ष डा. अनिल गोयल ने सर्विस टैक्स लगाए जाने पर इलाज के महंगे होने की संभावना जताई है।उन्होंने कहा कि इससे सबसे ज्यादा मार गरीब व मध्यम वर्ग को पड़ेगी। वहीं एडवोकेट अश्विनी त्रिखा ने भी इसे गलत बताया और इससे महंगाई बढ़ने की आशंका व्यक्त की है। हसला के पूर्व प्रधान सुशील कण्वा ने कहा कि आयकर की सीमा पुरुषों के लिए दो लाख, महिलाओं के लिए ढाई लाख और सीनियर सिटीजन्स के लिए तीन लाख होनी थी। आयकर की सीमा जो बढ़ाई गई है वह बहुत कम है।

वकीलों ने की सेवा कर की निंदा:-केंद्रीय बजट में वकीलों पर सेवा कर लगाने की कड़ी निंदा की गई है। पलवल बार एसोसिएसन के सदस्य शिवराम सौरोत व भूप सिंह सौरोत एडवोकेट ने उक्त फैसले की कटु आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वकील लोगों को न्याय दिलाते हैं, ऐसे में उन पर सेवा कर लगाना निंदनीय है। सौरोत ने कहा कि वकीलों का कार्य समाज सेवा के दायरे में आता है।वकील प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लोगों की सेवा करते हैं। लोगों को न्याय दिलाना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा सेवा कर लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा जिन लोगों की वकील करने की क्षमता नहीं होती है। ऐसे लोगों के केस वकील मुफ्त लड़ते हैं और उन्हें न्याय दिलाते हैं। साथ ही वकील न्याय पालिका का अहम हिस्सा है।सरकार ने वकीलों पर कर लगाकर उनके साथ कुठाराघात किया है। वकील समुदाय सरकार के फैसले का पुरजोर विरोध करता है और सरकार से फैसला तुरंत वापिस लेने की मांग करता है।

Monday, June 8, 2009

महिला सांसद पुरुषों से अधिक शिक्षित

नई दिल्ली। भारतीय महिला सांसद अपने पुरुष सहकर्मियों की तुलना में अधिक शिक्षित है और उनके चुनाव में विजयी होने की संभावना भी पुरुषों से अधिक है। एक नए अध्ययन के अनुसार पुरुषों की तुलना अधिक महिला सांसद परास्नातक डिग्रीधारी है।संसदीय शोध को समर्पित एक गैर लाभकारी संस्था 'पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च' के अध्ययन के अनुसार 15वीं लोकसभा की 59 महिला सांसदों में 32 प्रतिशत परास्नातक और शोध डिग्रीधारी है, जबकि पुरुष सांसदों में यह प्रतिशत 30 है। चुनाव में उम्मीदवार बनी 10 प्रतिशत महिलाएं विजयी हुई, वहीं केवल छह प्रतिशत पुरुष प्रत्याशी ही जीतने में सफल हुए।अध्ययन के अनुसार, इस बार लोकसभा में सबसे अधिक महिलाएं है और 545 सदस्यों में उनका प्रतिशत 11 है। राज्यसभा में 10 प्रतिशत और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या सात प्रतिशत है।सबसे अधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 29 प्रतिशत महिला सांसदों की संख्या 40 वर्ष के कम है। यह प्रतिशत पिछली लोकसभा से काफी बेहतर है, जिसमें 17 प्रतिशत महिला सांसद 40 वर्ष से कम उम्र की थीं। सभी 59 महिला सांसदों की औसत उम्र 47 वर्ष है, जो पुरुष सांसदों की औसत आयु 54 वर्ष से काफी कम है। किसी भी महिला सांसद की उम्र 70 वर्ष से अधिक नहीं है, जबकि सात पुरुष सांसद 70 साल से अधिक उम्र के है।पीआरएस के अनुसार 40 से 60 वर्ष के आयु समूह के बीच की महिला सांसदों का प्रतिशत इस बार काफी कम हुआ है। वर्ष 2004 में इस समूह की महिला सांसदों का प्रतिशत 73 था जो इस बार घटकर केवल 57 प्रतिशत रह गया। परंतु जहां 14 वीं लोकसभा में 60 वर्ष से अधिक की महिला सांसदों का प्रतिशत 9.8 था वहीं इस बार यह बढ़कर 13.8 प्रतिशत हो गया है।

बेरोजगार पिता ने की 5 बच्चों की हत्या

गाजियाबाद। गरीबी से तंग आकर गाजियाबाद में एक व्यक्ति ने अपने पांच बच्चों की कथित तौर पर हत्या करने और पत्‍‌नी को गंभीर रूप से घायल करने के बाद खुदकुशी की कोशिश की।पुलिस के मुताबिक गाजियाबाद की विजय नगर की रोजी कॉलोनी में रहने वाले 38 वर्षीय रवींद्र वर्मा और उसकी पत्‍‌नी दुर्गावती [35] को पड़ोसियो ने सोमवार सुबह सात बजे के आसपास घायल अवस्था में देखा जबकि दंपति के पांचों बच्चे अंजनी [14], प्रीति [10], मोना [8], देवराज [5] और नौ महीने के लकी का शव घर में पड़े थे।पड़ोसियों से सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने वर्मा और उनकी पत्‍‌नी को अस्पताल में भर्ती करवाया। दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। क्षेत्रीय अधिकारी आर. के. गौतम ने बताया, 'प्रथम दृष्टया यह अवसाद का मामला लगता है। वर्मा ट्रक चालक था अपने बयान में उसने कहा है कि पिछले दो महीने से वह बेरोजगार था। उसने पहले अपने बच्चों को मारा और फिर पत्‍‌नी एवं खुद को मारने का प्रयास किया।'

Friday, June 5, 2009

लश्कर का शीर्ष कमांडर दिल्ली में गिरफ्तार

नई दिल्ली : नेपाल में रहकर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों को संचालित कर रहा आतंकी मुहम्मद उमर मदनी गुरुवार को दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ गया। मदनी नेपाल में लश्कर का शीर्ष कमांडर था। उसके पास से पचास हजार के जाली नोट, आठ हजार यूएस डालर और नेपाली मुद्रा के साथ वहां बना ड्राइविंग लाइसेंस व फोन डायरी बरामद हुई है। पुलिस मदनी के दिल्ली आने के मंसूबों का पता लगाने में जुट गई है।दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के उपायुक्त आलोक कुमार के अनुसार जानकारी मिली थी कि नेपाल में भारत विरोधी गतिविधियां चला रहा लश्कर कमांडर मदनी दिल्ली आने वाला है। इस पर इलेक्ट्रानिक सर्विलांस के जरिए उस पर नजर रखी जा रही थी। पता चला कि वह नेपाल से अलीगढ़ के रास्ते दिल्ली आ गया है। इस पर पुलिस टीम ने गुरुवार शाम उसे कुतुबमीनार के मुख्य गेट के बाहर से गिरफ्तार कर लिया। उपायुक्त ने बताया कि मदनी के पास से पचास हजार के नकली नोट, आठ हजार यूएस डालर व चार हजार की नेपाली मुद्रा बरामद हुई है। इसके अलावा नेपाल का ड्राइविंग लाइसेंस, परिचय पत्र और टेलीफोन डायरी भी मिली है। डायरी में कई फोन नंबर तथा हवाला की जानकारी दर्ज है।उपायुक्त के अनुसार बरामद दस्तावेजों से पता लगाया जा रहा है कि मदनी राजधानी में किससे मिलने आया था। उसका यहां आने मकसद क्या था। सूत्रों के अनुसार मदनी मूल रूप से मधुबनी, बिहार का रहने वाला है। बीस साल से वह नेपाल में रह रहा था। पाकिस्तान में वह आतंकी प्रशिक्षण ले चुका है। वह नेपाल में लश्कर का शीर्ष कमांडर था। उसका काम पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत में आतंकियों को भेजना था। इसके अलावा वह नेपाल में लश्कर और हवाला का सारा काम देखता था। लश्कर के कोषाध्यक्ष जकीउर रहमान से भी वह लगातार संपर्क में था। मदनी को भारत के विभिन्न शहरों में लश्कर के स्लीपर माड्यूल्स तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया था।