समाज में सबको दिखाने के लिए अपनाए रखता है। समाज में लोक मर्यादा के कारण कई बार हमें अलग तरह से व्यवहार करना पडता है जिसे आप कमजोरी भी कह सकते हैं अत: इसके फलस्वरूप व्यवहार में भिन्नता होना स्वाभाविक है।हस्ताक्षर व्यक्ति के व्यक्तित्व का संपूर्ण आइना होता है अत: व्यक्ति के हस्ताक्षर में उसके व्यक्तित्व की सभी बातें पूर्ण रूप से दिखाई देती है। इस प्रकार हस्ताक्षर एक दर्पण है जिसमें व्यक्तित्व की परछाई स्पष्ट यप से झलकती है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर का पहला शब्द काफी बडा रखता है, वह व्यक्ति उतना ही विलक्षण प्रतिभा का घनी, समाज में काफी लोकप्रिय व उच्चा पद प्राप्त करने वाला होता है। हस्ताक्षर में पहला शब्द बडा व बाकी के शब्द सुन्दर व छोटे आकार में होते हैं, ऎसा व्यक्ति घीरे-घीरे उच्चा पद प्राप्त करते हुए सर्वोच्चा स्थान पाता है। ऎसा व्यक्ति जीवन में पैसा बहुत कमाता है। कई भवनों का मालिक बनता है व समाज में काफी लोकप्रिय होता है, किन्तु कुछ रंगीत तबियत का व संकोची स्वभाव का उत्तम श्रेणी का विद्वान भी होता है। वह अपने कुल का काफी नाम ऊँचा करता है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर इस प्रकार से लिखता है जो काफी अस्पष्ट होते हैं तथा जल्दी-जल्दी लिखे गये होते हैं, वह व्यक्ति जीवन को सामान्य रूप से नहीं जी पाता है। हर समय ऊँचाई पर पहुँचने की ललक लिए रहता है। इस प्रकार का व्यक्ति राजनीति, अपराघी, कूटनीतिज्ञ या बहुत बडा व्यापारी बनता है। जीवन आपाघापी में व्यतीत करने के कारण समाज से कटने लगता है तथा लोगों की अपेक्षा का शिकार भी बनता है। यह व्यक्तिगत रूप से पूर्ण संपन्न तथा इनका वैवाहिक जीवन कम सामान्य रहता है। घोखा दे सकता है परंतु घोखा खा नहीं सकता है। यह इनकी विशेषता है।
जो व्यक्ति हस्ताक्षर काफी छोटा व शब्दों को तोड-मरोडकर उनके साथ खिलवाड करता है जिसके फलस्वरूप हस्ताक्षर बिल्कुल पढने में नहीं आता है वह व्यक्ति बहुत ही घूर्त व चालाक होता है। अपने फायदे के लिए किसी का भी नुकसान करने व नुकसान पहुँचाने से नहीं चूकता। पैसा घन भी गलत रास्ते से कमाता है तथा ऎसा व्यक्ति राजनीति एवं अपराघ के क्षेत्र में काफी नाम कमाता है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर के नीचे दो लाइनें खींचता है वह व्यक्ति भावुक होता है। पूरी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाता, मानसिक रूप से थोडा कमजोर होता है। जीवन में असुरक्षा की भावना रहती है, जिसके कारण आत्महत्या करने का विचार मन में रहता है। पैसा जीवन में अच्छा होता है परंतु कंजूस स्वभाव भी रहता है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर के शब्दों को काफी घुमाकर सजाकर प्रदर्शित करके करता है वह व्यक्ति किसी न कसी हुनर का मालिक अवश्य होता है, यानि कलाकारख् गायक, पेंटर, व्यग्यकार व अपराघी होता है। ऎसे व्यक्तियों का समय जीवन के उत्तरार्द्ध में अच्छा होता है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर में नाम का पहला अक्षर सांकेतिक रूप में तथा उपनाम पूरा लिखता है तथा हस्ताक्षर के नीचे बिन्दु लगाता है, ऎसा व्यक्ति भाग्य का घनी होता है। मृदुभाषी, व्यवहार कुशल, समाज में पूर्ण सम्मान प्राप्त करता है। ईश्वरवादी होने के कारण इन्हें किसी भी प्रकार की लालसा नहीं सताती, इसके फलस्वरूप जो भी चाहता है स्वत: ही प्राप्त हो जाता है। वैवाहिक जीवन सुखी व संतानों से भी सुख प्राप्त होता है।
जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर के अंतिम शब्द के नीचे बिंदु (.) रखता है। ऎसा व्यक्ति विलक्षण प्रतिभा का घनी होता है। ऎसा व्यक्ति जिस क्षेत्र में जाता है काफी प्रसिद्धि प्राप्त करता है और ऎसे व्यक्ति से बडे-बडे लोग सहयोग लेने को उत्सुक रहते हैं।

जो व्यक्ति अपने हस्ताक्षर स्पष्ट लिखते हैं तथा हस्ताक्षर के अंतिम शब्द की लाइन या मात्रा को इस प्रकार खींच देते हैं जो ऊपर की तरफ जाती हुई दिखाई देती हे, ऎसे व्यक्ति लेखक, शिक्षक, विद्वान, बहुत ही तेज दिमाग के शातिर अपराघी होते हैं। ऎसे व्यक्ति दिल के बहुत साफ होते हैं हरेक के साथ सहयोग करने के लिए तैयार रहते हैं। मिलनसार, मृदुभाषी, समाज सेवक, परोपकारी होते हैं। यह व्यक्ति कभी किसी का बुरा नहीं सोचते हैं, सामने वाला व्यक्ति कैसा भी क्यों न हो हमेशा उसे सम्मान देते हैं। सर्वगुण संपन्न होने के बावजूद भी आपको समाज में सम्मान घीरे-घीरे प्राप्त होता है। जीवन के उत्तरार्द्ध में आपको काफी पैसा व पूर्ण सम्मान प्राप्त होता है। जीवन में इच्छाएं सीमित होने के कारण इन्हें जो भी घन व प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। उससे यह काफी संतुष्ट रहते हैं। अंत में यही कहूंगा कि हस्ताक्षर या लिखावट से हमारा सीघा संबंघ मानसिक विचारों से होता है, यानि हम जो सोचते हैं करते हैं। जो व्यवहार मे लाते हैं वह सब अवचेतन रूप में कागज पर अपनी लिखावट व हस्ताक्षर के द्वारा प्रदर्शित कर देते हैं। हस्ताक्षर के अघ्ययन से व्यक्ति अपने भविष्य व व्यक्तित्व के बारे में जानकारी कर सकते हैं और हस्ताक्षर में दिखाई देने वाली कमियों को दूर करते हुए अच्छे हस्ताक्षर के साथ-साथ अपना भविष्य व व्यक्तित्व भी बदल सकते हैं।



केंद्र सरकार ने गेहूं पर लगी स्टॉक सीमा को हटा दिया है जबकि चावल और खाद्य तेलों पर लगी स्टॉक सीमा की अवधि को इस साल 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को हुई मंत्रीमंडल की बैठक के बाद इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि अक्टूबर में इस फैसले की समीक्षा की जाएगी।

एक झोला छाप डॉक्टर की दवा खाने से रामदरबार में रहने वाले अमरीक सिंह की तीन साल की मासूम बच्ची की जान चली गई। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने जम कर हंगामा किया और झोला छाप डॉक्टर के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है।रामदरबार के मकान (नंबर 1823) में रहने वाले अमरीक सिंह एक गैस एजेंसी पर काम करते हैं। उनकी तीन साल की बेटी नयन्सी को शनिवार की शाम को उल्टियां होने लगी। बच्ची की हालत बिगड़ती देख परिजनों ने पास में दुकान चलाने वाले एक डॉक्टर को दिखाया। अमरीक के मुताबिक डॉक्टर ने कुछ दवाओं को पीस कर उसकी पांच पुड़िया बनाई और एक-एक पुड़िया दिन में तीन बार बच्ची को खिलाने के लिए कहा। अमरीक ने बच्ची को पहली खुराक दी। लेकिन उल्टी बंद नहीं हुई। उसकी हालत बिगड़ती देख परिजनों ने समझा कि तबीयत ज्यादा खराब है और एक खुराक दवा फिर दे दी।दवा की दूसरी खुराक देते ही मासूम की हालत और नाजुक हो गई हालत में बिलकुल भी सुधार नहीं हुआ और रविवार सुबह उसकी मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिजन उक्त डॉक्टर की दुकान पर पहुंचे तो दुकान बंद मिली। परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की लेकिन वह दुकान पर नहीं आया। काफी देर इंतजार करने के बाद लोगों ने दुकान के सामने हंगामा करना शुरू कर दिया। कुछ लोग बच्ची के पिता अमरीक सिंह और उसके रिश्तेदारों के साथ इंड्रस्टियल एरिया पुलिस स्टेशन पहुंचे। वहां डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। 
कड़ी पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंगलवार को इंजीनियरिंग की छात्रा प्रिंसी जैन की अंतिम यात्रा निकाली गई। शाम चार बजे पारासरी नदी स्थित श्मशान घाट पर गमगीन माहौल में भाई सौरभ ने प्रिंसी की चिता को मुखाग्नि दी। सोमवार को भोपाल के एमपी नगर मुख्य बाजार में एक युवक ने प्रिंसी जैन की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद प्रिंसी के परिजनों ने विरोध स्वरूप एक सराफा दुकान सहित आरोपी के घर पर तोड़-फोड़ की थी। तनाव की स्थिति बनने पर वहां पुलिस बल तैनात करना पड़ा था।प्रशासन को आशंका थी कि जब प्रिंसी का शव गंजबासौदा आएगा तो अप्रिय स्थिति बन सकती है। इसलिए जिले भर के थानों और भोपाल से बड़ी संख्या में पुलिस बल को बासौदा बुलवा लिया गया था।
एमपी नगर जैसे व्यस्ततम इलाके में सोमवार शाम कोचिंग सेंटर के पास छात्रा की हत्या की खबर से सनसनी फैल गई। यह वह समय था जब इस क्षेत्र में दो दर्जन कोचिंग सेंटर्स में हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिए आते हैं, साथ ही कारोबार के लिए भी इसी समय बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। भीड़भाड़ भरे इस इलाके में खुलेआम हत्या कर आरोपी के फरार हो जाने से पुलिस की चौकसी पर भी सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं। 
